रजनीश मिश्र, गाजीपुर
देश के सबससे लंबे एक्सप्रेस-वे के बनने से न केवल गाजीपुर लखनऊ से जुड़ जाएगा बल्कि पूर्वांचल के उन नौ जिलों को भी गति मिलेगी जिन जिलों से हो कर यह मार्ग गुजरेगा। यह फिलहाल यह एक्सप्रेस-वे 6 लेने का होगा, लेकिन जरूरत पड़ी तो इसे भविष्य में 8 लेन का भी किया जाता है। कहजा जाता है कि सड़कों के रास्ते ही विकास गांवों तक पहुंचता है। अगर यह बात सही है तो निश्चित चौतर पर पूर्वांचल के उन जिलों के काया कल्प हो जाएंगे उन्हें उद्योग शून्य कहा जता है। हलाकि इस इस एक्सप्रेस वे के निर्माण के श्रेय लेने के लिए भी सपा, बसपा और भाजपा में होड़ मची हुई है। उल्लेखनीय है कि बसपा सुप्रीमो मायावती के शासनकाल में यमुना एक्सप्रेस वे का निर्माण हुआ था, जो आगरा से दिल्ली को जोड़ता है। इसी तरह मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने शासनकाल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का निर्माण करवा कर लोगों का सफर सरल और सुगम कर दिया था। लेकिन इन दोनों एक्सप्रेस वे में कथित घोटालों की बू आने पर युमुना एक्सप्रेस वे की सीबीआई जांच करवाई गई थी। पिछले साल मानसूनी बरसात में कई जगहों पर आगरा एक्सप्रेस वे घंस जाने के कारण भी चर्चा में आया था। जिक्र योग्य है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस की शुरुआत 22 दिसंबर 2016 को समाजवादी पार्टी की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाया। अब पिछले साल भारतीय जनता पार्टी की योगी आदित्य नाथ की सरकार में 23349 करोड़ की लागत से 341 किलोमिटर लंबे एक्सप्रेस वे का शिलान्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इसके साथ ही उन्होंने इसे 36 महीनों इस एक्सप्रेस वे के निर्माण के काम को पूरा करने की ताकिद भी की। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि इस दिशा में अपनी सरकार में उन्होंने काम शुरू किया था। इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की आधारशिला तो उन्होंने समाजवादी पार्टी की सरकार में रखी थी। मोदी और योगी तो उनके किए कामों का श्रेय ले रहे हैं। खैर जो भी लखनऊ के चंद सराय से शुरू हो कर बाराबंकी,
सुल्तानपुर, अमेठी, फैजाबाद, अंबेडकर नगर, आजमगढ, मऊ और गाजीपुर हैदरिया होते हुए बिहार को जोड़ेगा।
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के साथ औद्योगिक कॉरीडोर भी बनाए जाने की याेजना है, जिससे पूर्वाचल को विकास के पंख लग जाएगें। यही नहीं पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को अयोध्या, इलाहावाद, वाराणसी और गोरखपुर से लिंक रोड से जोडा जाएगा। इससे इन मार्गों के आसपास नए शैक्षणिक संस्थान, चिकिस्ता संस्थान, औद्योगिक केंद्र और मंडी भी बन सकती है, जिससे लोगों को नए-नए रोजगार के अवसर प्राप्त होगें। गाजीपुर के सांसद और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की माने तों पूर्वाचल एक्सप्रेस पूरी तरह कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा। इसके बनने के बाद दुर्घटनाओं में कमी के साथ प्रदूषण स्तर कम होने के साथ ही ईधन की भी बचत होगी और ट्रकों की फेरी बढने के साथ ही व्यापारियों को गति और ट्रांस्पोर्टरों को लाभ मिलने के साथ-साथ राजस्व भी बढ़ेगा।
एक्सप्रेस-वे के आसपास पड़ने वाले गांवाें और कस्बों के लोगों ने जिले के बाराचवर गांव के पास अत्याधुनिक मंडी बनाने की केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है। किसान बाराचवर के किसान महेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह, अमरनाथ यादव, विजय शंकर यादव, दयाशंकर चौबे, राजेश कुशबाहा, मुन्ना कुजडा, दिलशादपुर के अमर नाथ सिंह, मृत्युंजय पांडे, रामध्यान राम सहित सिउरी अमहट,कामुपुर, तिराहीपुर और बलिया जिले के गांव मुडेरा और रसडा। गाजीपुर जिले के परसा,
परानपुर, ढोढाडीह, राजापुर सहित दर्जनों गांवों के किसानों का कहना है कि बाराचवर ब्लाक मुख्यालय होने के साथ-साथ बलिया की तहसील रसड़ा और गाजीपुर की तहसील मुहम्मदा और मऊ जिले को जोडा है। इसलिए यहां मंडी बनाने से गाजीपुर, बलिया और मऊ जनपद की हद में आने वाले किसानों को लाभ मिलेगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किनारे अत्याधुनिक मंडी निर्माया करवाए ताकि यहां के किसानों को अपने उत्पाद लेकर दूर न जाना पडे।

उद्योग लगाने की भी मांग बढ़ी
जैसे-जैसे एक्सप्रेस-वे के काम में तेजी आती जा रही है वैसे-वैसे लोगों की सरकार से अपेक्षाएं भी बढती जा रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उद्योग के नाम पर गाजीपुर और बलिया जिलों में कोई औद्योगिक इकाई नहीं है। और ना ही इस क्षेत्र में कोई औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र हैं। इस लिए सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। तभी इस क्षेत्र के युवाओं का रोजगार और क्षेत्र का विकास होगा। लोगों का कहनाप है कि इस क्षेत्र में प्राइमरी, मीडिल और इंटर कॉलेजों की कमी नहीं है, लेकिन स्कील डेवलपमेंट के लिए कोई तकनीकि प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं। इसके लिए सरकार को चाहिए कि एक्सप्रेस वे के किनारें उद्योग लगाने के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जिससे आने वाली युवा पीढि़ का भविष्य सवंर सके।
क्या सच में बदल जाएगी ग्रामीण क्षेत्रों की तकदीर
यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की उस बात पर यकीन किया जाए जिसमें उन्होंने कहा था कि एक्सप्रेस वे बनने के बाद पूर्वांचल में औद्योगिक क्रांति लाई जाएगी। या ग्रेटन नोएडा से आगरा तक 14 हजार करोड़ की लागत से बने 185 किमी लंबा, 100 मीटर चौड़ा 6 लेन युमना एक्सप्रेस वे के बनने के बाद उस क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को देखें तो सच में यह सपना साकार होता दिख रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि औद्योगिक इकाइयां लगने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के शिक्षित युवाओं, किसानों और व्यवसाइयों को रोजगार के अवसर मिलेगें।
औद्योगिक नगरी नोएडा के समीप आएगा गाजीपुर
गाजीपुर के सांसद और संचार मंत्री मनोज सिन्हा कहते हैं कि भाजपा सबका साथ-सबका विकास के फार्मुेले पर चलती है। प्राधान मंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लखनऊ से गाजीपुर तक करीब 12 करोड से बनने जिस 341 किमी लंबे 6 मार्गी जिस पूर्वाचल एक्सप्रेस वे की नींव रखी है उसे तय समय में पूरा किया जाएगा। निश्चित तौर पर देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस वे के बनने के पूर्वांचल में औद्योगिक क्रांति आएगी। इससे औद्योगिक नगरी नोएडा से गाजीपुर की दूरी मात्र 452 किमी रह जाएगी। जाहिर है सड़के अच्छी रहेंगी तो विकास की गाड़ी निश्चित तौर पर तेजी से दौड़ी। सिंन्हा ने कहा कि गाजीपुर ही नहीं बल्कि बिहार के बक्सर, बलिया, मऊ वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ, अकबरपुर, अयोध्या आदि जिलों और शहरों को लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों में पर्यटन उदद्योंग भी तेजी से बढेगा और काफी हद तद बेरोजगारी पर लगाम लगेगी। सिन्हा कहते हैं कि इसके आसपास कृषि, मंडी, कोल्ड स्टोरेज, इंडस्ट्रियल ट्ेनिंग सेंटर, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, हैंडलूम सहित अन्य छोटे, बड़े और मझोले उद्योग विकसित होंगे। इसके साथ ही 10 किमी दूर स्थित गांवों की भी इससे कनेक्टिविंटी होगी।

पूर्वाचल एक्सप्रेस वे की खास बातें
देश के सबसे लंबे इस एक्सप्रेस वे के निर्माण में कोई भी गांव या बाजार नहीं उजाड़े गए हैं। पूरर्वांचल एक्सप्रेस वे के आसपास पड़ने वाले गांवों और बाजारों को बचाने के लिए यूपीडा ने गांवों के आसपास एलाइमेंट ही बदल दिया है। इस एक्सप्रेस वे पर 18 फ्लाइओवर और 8 रेल ओवरव्रिज बनाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी खतरों का सामना न करना पड़े।
सुल्तानपुर के पास एक्सप्रेस वे का निर्माण इस तरह किया जाएगा कि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमानों को उतारा जा सके।एक्सप्रेस वे के रास्ते में पड़ने वाले कुछ स्कूल व बिजली की लाइनों को हटाया जाएगा।
एक्सप्रेस वे का निर्माण होने से चार से पांच घंटे में गाजीपुर से प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचा जा सकेगा। दो वर्ष 6 माह में बन कर तैयार होने का लक्ष्य रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इस मार्ग को 8 मार्गीय भी किया जा सकता है।



