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| फोटो स्रोट सोशल साइट़स |
दुर्गेश मिश्र
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखने वाला जालंधर का खेल सामग्री उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। यह संकट कुछ कच्चे माल की अनुपलब्धता और कोरोना की वजह से देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से खड़ा हुआ है। लॉकडाउन के कारण कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह ठप है। इससे आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहा है।
दो हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित
खेल के विभिन्न सामानों को तैयार करने वाले उद्योगों से जुड़े लोगों के मुताबिक जालंधर का करीब 2,000 करोड़ रुपये का खेल सामग्री उद्योग भी संकट के दौर से गुजर रहा है। उद्यमियों के मुताबिक कोरोना के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हालात की वजह से खेल सामग्री विनिर्माता उन्हें मिलने वाले आर्डर टाल रहे हैं।
भविष्य को लेकर चिंतित हैं कारोबारी
इन दिनों चल रही देशव्यापी बंदी की वजह से जालंधर के खेल सामान विनिर्माता अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते मामलों के कारण सरकार लॉकडाउन को 30 अप्रैल से भी आगे बढ़ा सकती है।
खेल सामानों का बड़ा हब है जालंधर
जालंधर देश का खेल से जुड़े सामानों के निर्माण का बहुत बड़ा हब है। यहां बैट, हॉकी, बालीवॉल, बैडमिंटर, स्पोट्स सूज, रग्बी और फिटेनस सामान सहित अन्य खेल साग्रियां बनती हैं। यानी देश में विनिर्मित कुल खेल सामग्री का 70-80 प्रतिशत विनिर्माण जालंधर में होता है। यहां की बनी वस्तुओं का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात की जाए तो जालंधर में बना खेल का सामान का आस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड सहित दुनिया के विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है। हालांकि, यहां के उद्योगपति केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाई बंदिशों का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उद्योगपतियों का कहना है कि इसके चलते उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। खेल उद्योग से जुड़े अतुल कुमार कहते हैं कि उनकी कंपनी रग्बी के सामान की प्रमुख निर्यातक है। उनका फुटबॉल, बैट और अन्य खेल सामग्री का न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देशों के लिस भेजा गया था। जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन की वजह से दिल्ली और मुंबई में फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोराना संकट खत्म होने के बाद सरकार को उद्योगों के लिए पैकेज देने चाहिए।
कच्चा माल भी कारोबार को कर रहा है प्रभावित
खेल के सामान बनाने वाले लोगों का कहना है कि बैट के चीड़ की लकडि़यों की जरूरत होती है। ये लकडि़यां हलकी और मजबूत होती। चीड़ की लकड़ी जम्मू-कश्मीर से आती हैं। लेकिन, पाबंदी की वहज से ये लकड़ी नहीं मिल पा रही है। इसके अलवा बॉल के लिए लेदर की आवश्यकता होती, लेकिन वह भी नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से भी खेल उद्योग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि इस समय कारीगरों और कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखने वाला जालंधर का खेल सामग्री उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। यह संकट कुछ कच्चे माल की अनुपलब्धता और कोरोना की वजह से देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से खड़ा हुआ है। लॉकडाउन के कारण कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह ठप है। इससे आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहा है।
दो हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित
खेल के विभिन्न सामानों को तैयार करने वाले उद्योगों से जुड़े लोगों के मुताबिक जालंधर का करीब 2,000 करोड़ रुपये का खेल सामग्री उद्योग भी संकट के दौर से गुजर रहा है। उद्यमियों के मुताबिक कोरोना के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हालात की वजह से खेल सामग्री विनिर्माता उन्हें मिलने वाले आर्डर टाल रहे हैं।
भविष्य को लेकर चिंतित हैं कारोबारी
इन दिनों चल रही देशव्यापी बंदी की वजह से जालंधर के खेल सामान विनिर्माता अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते मामलों के कारण सरकार लॉकडाउन को 30 अप्रैल से भी आगे बढ़ा सकती है।
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जालंधर देश का खेल से जुड़े सामानों के निर्माण का बहुत बड़ा हब है। यहां बैट, हॉकी, बालीवॉल, बैडमिंटर, स्पोट्स सूज, रग्बी और फिटेनस सामान सहित अन्य खेल साग्रियां बनती हैं। यानी देश में विनिर्मित कुल खेल सामग्री का 70-80 प्रतिशत विनिर्माण जालंधर में होता है। यहां की बनी वस्तुओं का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात की जाए तो जालंधर में बना खेल का सामान का आस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड सहित दुनिया के विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है। हालांकि, यहां के उद्योगपति केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाई बंदिशों का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उद्योगपतियों का कहना है कि इसके चलते उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। खेल उद्योग से जुड़े अतुल कुमार कहते हैं कि उनकी कंपनी रग्बी के सामान की प्रमुख निर्यातक है। उनका फुटबॉल, बैट और अन्य खेल सामग्री का न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देशों के लिस भेजा गया था। जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन की वजह से दिल्ली और मुंबई में फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोराना संकट खत्म होने के बाद सरकार को उद्योगों के लिए पैकेज देने चाहिए।
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खेल के सामान बनाने वाले लोगों का कहना है कि बैट के चीड़ की लकडि़यों की जरूरत होती है। ये लकडि़यां हलकी और मजबूत होती। चीड़ की लकड़ी जम्मू-कश्मीर से आती हैं। लेकिन, पाबंदी की वहज से ये लकड़ी नहीं मिल पा रही है। इसके अलवा बॉल के लिए लेदर की आवश्यकता होती, लेकिन वह भी नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से भी खेल उद्योग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि इस समय कारीगरों और कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी हो रही है।


