हिंदी सिनेमा की तिलिस्मी दुनिया में अमृतसर के सितारे छाए हुए है। चाहे वह गायक हों या खलनायक। फिल्मों के नायक भी ऐसे हुए हैं कि उम्र के एक पड़ाव पर सिनेमा दूर होने के बाद उन्की फिल्मों के दर्शकों की संख्या कम नहीं हुई है। खनायकों की बात करें तो डैनी डैंगजोपा के बाद यदि कोई दूसरा विलेन था तो वह थे रंजीत, जिनके पर्दे पर आते ही दर्शक कांप उठते थे। यही नहीं रंजीत के नाम फिल्मजगत में आनस्क्रीन पर 350 से भी अधिक बलात्कार सीन करने का अजीब रिकार्ड दर्ज है।
दुर्गेश मिश्र
सदियों से अपनी संस्कृति, सरहदी जज़्बे और रूहानी विरासत के लिए पहचाना जाने वाला अमृतसर केवल आस्था और इतिहास का शहर नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की जन्मभूमि भी है। अमृतसर की गलियों से उठी कई आवाज़ों और चेहरों ने भारतीय सिनेमा के परदे पर अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां की मिट्टी में बसी संवेदनशीलता, संघर्ष और जुनून ने कलाकारों को वह गहराई दी, जिसने उन्हें दर्शकों के दिलों तक पहुंचाया।
चाहे अभिनय हो, निर्देशन, लेखन या संगीत—अमृतसर के चमकते सितारों ने न केवल पंजाबी सिनेमा, बल्कि हिंदी फिल्म जगत में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। यह शहर सिर्फ सीमाओं का प्रहरी नहीं, बल्कि सपनों का भी रखवाला है, जहां से निकलकर कई कलाकारों ने मायानगरी में अपना आसमान खोजा।
आइए, जानते हैं सिनेमा की दुनिया में अमृतसर के उन चमकते सितारों के बारे में, जिन्होंने अपनी मेहनत और हुनर से इस पावन नगरी का नाम रोशन किया।
<
b>पार्व गायन में चार नाम जिनपर फिदा है कायनात
अमृतसर ने हिंदी सिनेमा को ऐसे चार अनमोन पार्व गायक दिए जिनपर भारतीय सिनेमा तो क्या पूरी कायनात (दुनिया) फिदा है। या यूं कहें कि इनके कंठ में साक्षात मां सरस्वती का वास है। ये चार अनमोल रत्न हैं- मो. रफी, महेंद्र कपूर, नरेंद्र चंचल और जसपाल सिंह। इन गायकों के सुरों में ऐसा जादू है कि आज इनमें गीत कहीं बज रहे हों तो उस गली से गुजरने वाला राहगीर एक बार गुनगुनाता जरूर है।
सिनेमा के हनुमान
हम बात कर रहे हैं दीदार सिंह रन्धावा यानि दारा सिंह की। मूल रूप सेद अमृतसर के गांव धरमूचक के रहने वाले दारा सिंह जीवन की शुरुआत तो कुश्ती के दांवपेच से हुई, लेकिन रुपहले पर्दे पर भी इनकी धमक अलग ही थी। दारा सिंह ने 1952 में फिल्म संगदिल से हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया। तब ब्लैक एंड व्हाईट फिल्मों का दौर था। दारा सिंह ने कई प्रसिद्ध फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैहै फौलाद (1963), सिकंदर-ए-आज़म (1965), डाकू मंगल सिंह (1966), और मेरा नाम जोकर (1970)। मुमताज के साथ इन्होंने 16 से अधिक फिल्में की। कई पौरारिणक फिल्मों में भी मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन 1986 में 'रामायण' में हनुमान की भूमिका निभाकर दारा सिंह घर-घर में लोकप्रिय हुए।
राजेशा खन्ना
राजेश खन्ना का जन्म भी अमृतर के तिवारियां वाली गली में सन 1942 में हुआ था। इनका पुश्तैनी मकान अब मंदिर बन चुका है। राजेश खन्ना 6 साल की उम्र में ही मुंबई चले गए थे। हिंदी सिनेमा में 1966 में फिल्म 'आखिरी खत' से कदम रखा । सफलता की जिस बुलंदी पर राजेश खन्ना पहुंचे थे उस सोपान (सीढ़ी) तक विरले ही पहुंच पाते हैं।
जंपिंग मैन जितेंद्र
हिंदी सिनेमा में जंपिंग मैन के नाम से मशहूर जितेंद्र का जन्म भी गुरु नगरी में 1942 में गुरु नगरी में ही हुआ था। बचपन के रवि कपूर यानी जितेंद्र ने '1964 में गीत गाया पत्थरों ने ' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और वर्ष 2007 तक रुपहले पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहे। जितेंद्र के चाहने वाले उन्हे प्रेम से जीतू भाई और 70 और 80 के दशक में उन्हें "बॉलीवुड के जंपिंग जैक" के रूप में काफी प्रसिद्धि मिली।
विजय अरोड़ा
वर्ष 1973 में आई फिल्म यादों की बारात में गिटार बजाते जीनत अमाने के साथ मुख्य भूमिका में दिखाई देने वाले विजय अरोड़ा का जन्म दिसंबर 1944 में अमृतसर के नमक मंडी में हुआ था। साल 1971 में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे से स्नातक गोल्ड मेडलिस्ट विजय अरोड़ा ने 1972 में 9 एमएम के पर्दे पर अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। इन्हें असली पहचान रामानंद सागर के ' रामायण' इंद्रजीत का किरदार निभाकर मिली और ये घर-घर पहचाने जाने लगे थे।
प्रवीण कुमार को 'भीम' से मिली पहचान
लंबे कदकाठी के प्रवीण कुमार सोबती का जन्म अमृतसर जिले के सरहाली में दिसंर 1947 में हुआ था। हलांकि अब सरहाली तरनतारन जिले का हिस्सा है। खालसा कालेज से ग्रेजुएट प्रवीण कुमार 1960 और 1970 के दशक में भारतीय एथलेटिक्स के प्रमुख सितारे थे। उन्होंने कई वर्षों तक भारतीय हथौड़ा और चक्का फेंक खेलों पर अपना दबदबा कायम रखा। यह बीएसएफ में सैनिक भी रहे हैं। प्रवीण कुमार की पहली फिल्म रक्षा थी, जिसमें उन्होंने जितेन्द्र के साथ अभिनय किया था। फिल्म शहंशाह में अमिताभ बच्च के साथ दिखे थे। धारावाहिक 'चाचा चौधरी' में साबू की भूमिका में दिखे। लेकिन प्रवीण कुमार को असल पहचान बीआर चोपड़ा धारावाहिक 'महाभारत' में भीम का किरदार निभाकर मिली। प्रशंसक उन्हें सच में 'भीम' के रूप में देखने लगे थे।
अक्षय कुमार
अपने 30 वर्ष के फिल्मी करियर में 150 अधिक फिल्मों में काम कर चुके अक्षय कुमार का फैमिली बैकग्राउंड भी अमृतसर के छेहरटा है। हलांकि इनका परिवार वर्षों पहले दिल्ली के चांदी चौक में जाकर बस गया था। हर तहर की भूमिकाओं में रम जाने वाले हरिओम भाटिया यानी अक्षय कुमार को उनके प्रसंशकों ने खिलाड़ी कुमार नाम दिया है और ये 58 साल की उम्र में भी फिल्मों में सक्रिय है। अक्षय कुमार ने वर्ष 1991 में 'सौगंध' फिल्म से डेब्यू किया था और आज सफल अभिनेताओं में से एक हैं।
रंजीत
हिंदी सिनेमा का वह खतरनाक विलेन जिसके पर्दे पर आते दर्शकों में सिहर सी दौड़ जाती थी। जी हां हम बात कर रहे हैं गोपाल सिंह बेदी की। जिन्हें दुनिया रंजीत के नाम से जानती है और यह नाम दिया अपने जमाने सुपर स्टार सुनील दत्त साहब ने। रंजीत का जन्म अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु में 1942 में हुआ था। इन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। अधिकतर फिल्मों विलेन की भूमिका अदा की। रंजीत का फिल्मी सफर 1970 शुरू हुआ और ये 2025 तक सक्रीय रहे। फिल्मजगत में आनस्क्रीन पर 350 से भी अधिक बलात्कार सीन करने का अजीब रिकार्ड उनके नाम दर्ज है। अमिताभ बच्चन की अधिकतर फिल्मों में नकारात्मक भूमिका में रंजीत देखे जाते हैं।
इनका भी संबंध है अमृतसर से
वर्ष 1960 से 1947 तक अभिनेताओं के बाद अब बात करते हैं दूसरी पीढ़ी के अमृतसर में जन्में उन सितारों की जो बालीबुड में अपनी चमक बिखेर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं कामेडी किंग कपिल शर्मा, भारती सिंह सहित लंबी फेहरिस्त है जिनका संबंध किसी न किसी रूप में अमृतसर से है।